भारतीय संस्कृति और आतंकवाद संस्कृति में अंतर

दुनिया में हिन्दुस्तान की संस्कृति दुनिया से भिन्न रही है और हमने हमेशा अहिंसा परमो धर्मः का पाठ पढ़ा और और दूसरों को पढ़ाया है। हम रास्ते में चलते हैं तब भी कोशिश करते है कि हमारे पैर के नीचे कोई जीव अथवा चींटी या कीड़ा मकोड़ा जीव तक मरने न पाये।इतना ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति में बेगुनाह नहीं बल्कि गुनाहगारों का भी खून बहाने की इजाजत नहीं है। वैसे अगर देखा जाय तो दुनिया में फैले किसी भी धर्म मजहब में बेगुनाहो, गरीबों मजलूमों का खून बहाने और आतंक फैलाने की इजाजत नहीं दी गई बल्कि दया क्षमा,परहित, परोपकार और सेवा भाव को इंसानी धर्म माना गया है। हम जिस धरती पर पैदा हुए हैं उसे माता मानकर उसकी आनबान शान के लिये अपने प्राणों का न्यौछावर करना अपना धर्म मानते है और जिसका नमक खाते उसके साथ नमक हरामी नहीं करते हैं बल्कि मौका पड़ने पर बदले में जान दे देते हैं। हमारी संस्कृति जम्मू कश्मीर में बैठे उन लोगों एवं संगठनों की तरह नहीं है जो दिन के उजाले में देश की सरजमीं पर रहते खाते पीते सोते और शौचादि करते हैं लेकिन रात अंधियारे में गुणगान दुश्मनों की गाते हैं और अपनी मातृभूमि से गद्दारी कर पीठ में छूरा भौंककर आतंकियों को अपने दामाद की तरह पनाह और दैशद्रोहियों, आतंकियों की मौत पर खुशी नहीं मातम मनाते हैं। हमारे यहाँ आतंकवाद की शुरुआत जम्मू कश्मीर की सरजमीं से शुरू हुयी है।सभी जानते हैं कि आजादी के समय से ही काश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे मे है जो आतंकियों का चारागाह बना हुआ था। पाकिस्तान आजादी के समय से हमारे देश को दुश्मन मानकर तबाह देखना चाहता है लेकिन बंगलादेश बनने के बाद तो उसने काश्मीर की आजादी के नाम पर जिहादियों आतंकियों की नर्सरी डालकर अघोषित युद्ध शुरू कर दिया रखा है। हमारी धर्मनिरपेक्षता की आड़ में उसने जम्मू कश्मीर में कुछ अपने कुत्ते पाल रखा है। आज वही पाकिस्तानी पालतू कुत्ते जम्मू कश्मीर की संस्कृति को नष्ट भ्रष्ट कर आतंकियों एवं पाकिस्तान समर्थकों को संरक्षण देकर जेहाद के नाम फियादीन आतंकी बनाने लगे हैं।


आजादी के बाद जम्मू कश्मीर को ऐसी गंदी राजनीति करने वाले लोगों के हाथ सौंप दिया गया जो वोट की लालच में दैशद्रोहियों के प्रति नरम व्यवहार बनाये रहे। इसका परिणाम यह है कि अब पाकिस्तान अपनी नही बल्कि हमारी ही सरजमीं से आतंकी पैदा कर उन्हीं से हमले करवा कर बेगुनाही एवं हमारे जवानों की जान लेने लगा हैं। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद दुनिया में तबाही मचा रहा है और इससे दुनिया की महाशक्तियों तक खौफ खा रही है तथा अमेरिका तक इसका शिकार हो चुका है। जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान की भारत विरोधी आतंकी विंग राजनैतिक आड़ में विभिन्न राजनैतिक दलों के रूप में खड़ी कर दी है जो काश्मीर आजाद कराने वाले जिहादियों की जमात बनी हुयी हैं। अभी तीन दिन पहले हुआ आतंकी हमला पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर के मिलेजुले आतंकवाद का परिणाम है। हमले बहुत दिनों से हो रहे हैं और अबतक न जाने कितने शहीद भी हो चुके हैं लेकिन जिस तरह का उबाल सीआरपीएफ के जवानों पर के बाद देशवासियों में आया है ऐसा उबाल इसके पहले शायद देशवासियों में कभी नहीं आया है। बार बार माफ करने और छीनी भूमि वापस देने तथा काश्मीर में पाकिस्तान समर्थक राजनैतिक दलों तथा दैशद्रोहियों को नजरअंदाज करने का ही परिणाम है कि पुलवामा घटना के बाद भी आतंकी घटनाएं होती जा रही है और एक युवा देश का लाल मेजर के रूप में परसो सीमा पर शहीद हो गया।


देश में बढ़ता आतंकवाद भविष्य के लिए शुभ नहीं कहा जा सकता है और इसे समूल नष्ट करना ही देश के लिए होगा। आतंकवाद के सफाये लिये श्रीलंका द्वारा लिट्टे के खिलाफ की गई कार्यवाही का अनुसरण करना होगा। जब अमेरिका पाकिस्तान में घुसकर लादेन को मारकर लाद ले जा सकता है तो हम जैश सरगनाओं को क्यों नहीं कर सकते है। जैश मोहम्मद जैसे आतंकी कुनबा हमारे यहाँ हुयी पुलवामा घटना का मुजरिम तो है ही हमें जो जम्मू कश्मीर सहित पाकिस्तान के अन्य राजनीतिक दलों का लबादा ओढ़े भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं उन्हें भी बेनकाब करना होगा।ऐसे लोगों को हमारी धरती पर रहने का कोई हक नहीं है जो गद्दारी कर रहे हैं। ऐसे लोगों को दी गई सुरक्षा वापस लेकर सरकार ने इस दिशा में एक बेहतर शुरुआत की है लेकिन देशवासियों का कलेजा ठंढा नहीं हुआ है और वह आरपार का फैसला करने की मांग कर रहा है जो सर्वथा जायज है।