चीन का चहेता क्यों है भारत को लहूलुहान करने वाला ?
म्मू-कश्मीर के पुलवामा में भीषण आतंकी हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। साथ ही इस आतंकी सरगना को लेकर चीन का हमदर्दी भरा रुख भी फिर से खुलकर सामने आया है। मौलाना मसूद ने पनाह पाकिस्तान में ले रखी है, पर उसे शह बीजिग से मिलती रही है। खबर है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर में उसका ठिकाना है और वहीं वह आतंक की नर्सरी चला रहा है। 2००1 के संसद हमले और 2०16 के पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड मसूद को संयुक्त राष्ट्र के जरिये वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाने की भारत की हर कोशिश को चीन नाकाम करता आया है। 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ऐसा अकेला देश है, जो मसूद का हमदर्द बना हुआ है। आखिर क्या वजह है कि मसूद पर जब भी नकेल कसने की कोशिश होती है तो चीन उसकी ढाल बन जाता है? इसके पीछे कई कारण गिनाए जाते है।

जैश-ए-मोहम्मद को सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में शामि

आतंकी सरगना मौलाना मसूद पर चीन का रुख यह साफ बताता है कि भारत भले ही आहत होता रहे, पर पाकिस्तान उसके अहसान तले दबा रहे। पुलवामा हमले के बाद भी चीन का वही रुख सामने आया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग से जब मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी सूची में डालने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'जहां तक इस मुद्दे के लिस्टिंग का सवाल है, मैं आपको कह सकता हूं कि सुरक्षा परिषद की 1267 कमिटी ने लिस्टिंग और आतंकी संगठनों पर अपनी प्रक्रिया और शर्तें साफ कर दी हैं। जैश-ए-मोहम्मद को सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। चीन इस मसले का जिम्मेदारपूर्ण तरीके से हैंडल करना जारी रखेगा।' दरअसल, चीन जहां भारत को प्रतिद्बंद्बी या कहें कि चुनौती के रूप में देखता है, वहीं पाकिस्तान से उसकी यारी किसी से छिपी हुई नहीं है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर चीन भारी-भरकम निवेश कर रहा है। वहीं, पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में भी चीन कई परियोजनाएं चला रहा है। चीन और पाकिस्तान के बीच रिश्ते की बुनियाद 'एक हाथ से ले, दूसरे हाथ से दे' वाली नीति पर टिकी है। पाकिस्तान निर्गुट देशों (नैम) के शिखर सम्मेलन या फिर इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के सम्मेलन में चीन की तरफदारी करता रहा है, वहीं बदले में चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने वीटो का इस्तेमाल पाकिस्तान के पक्ष में करता रहा है।

 

पाकिस्तान पर चीन मेहरबान 

चीन पर अपने देश में अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिमों के खिलाफ दमनकारी नीति अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। 199० से जर्मनी में निर्वासित जीवन जी रहे उइगर समुदाय के चीन का बागी नेता डोलकन ईसा अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह मसला उठाता रहा है। चीन के शिजियांग प्रांत में उसपर आतंकवाद फैलाने के मामले चल रहे हैं। उधर, इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के सम्मेलन में भी चीन में उइगर पर दमन का मुद्दा उठता रहा है, पर पाकिस्तान हर बार चीन का पक्ष लेता रहा है। चीन हाल में ही 12 देशों के राजनयिकों को शिजियांग प्रांत ले गया था, जहां हजारों उइगर मुस्लिमों को हिरासत में रखने के आरोप हैं। उस मौके पर भी चीन में पाकिस्तान दूतावास की प्रभारी मुमताज जाहरा बलोच ने चीन के सरकारी ग्लोबल टाइम्स से कहा था, 'इस दौरे के दौरान मुझे जबरन श्रम या सांस्कृतिक एवं धार्मिक दमन का कोई मामला नहीं मिला।' शिजियांग में सुरक्षा स्थिति के बारे में बलोच ने कहा, 'हमें पता चला है कि हाल के उपायों से शिजियांग में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है और हाल के महीनों में आतंकवाद की कोई घटना नहीं हुई है। जाहिर है कि उइगर मुस्लिमों पर पाकिस्तान का साथ मिलने पर चीन भी उस पर मेहरबान रहा है।