इण्डिया फूड एक्सपो 2019 का शुभारम्भ
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में रोजगार की अपार सम्भावनायें

 

लखनऊ,  22 फरवरी।  उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण की अपार सम्भावनाये है क्योंकि उत्तर प्रदेश खाद्याान्न उत्पादन में अन्य राज्यों की तुलना में अग्रणी है जबकि उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण मात्र 4 प्रतिशत है। ये विचार प्रमुख सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण उ.प्र. .सुधीर गर्ग ने आई.आई.ए. भवन, विभूति खण्ड में आयोजित इण्डिया फूड एक्सपो 2019 के उद्घाटन अवसर पर प्रकट किये। उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसीय फूड एक्सपो में खाद्य प्रसंस्करण से सम्बन्धित मशीनों, तकनीको टेस्टिंग सुविधाओं तथा शोध संस्थाओं द्वारा विभिन्न प्रकार के उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। ये समाज के सभी वर्गों के लिये उपयोगी है। सुधीर गर्ग ने कहा कि ताईवान जैसे देश में उत्पादित खाद्य पदार्थों का 90 प्रतिशत भाग प्रसंस्कृत होता है जबकि उत्तर प्रदेश में यह क्षमता अभी मात्र 4 प्रतिशत है। हमें इस क्षमता को एक वर्ष में दो गुना करने का प्रण लेना होगा। श्री गर्ग ने आई.आई.ए. से अपेक्षा की कि वह एंकर उद्यमी तैयार कर गांव में किसानों से मिलकर सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइया स्थापित कराये। उन्होंने कहा कि यदि खाद्य प्रसंस्करण का कार्य घर घर पहुंचेगा तो प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण की क्षमता में वृद्धि होगी।

प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने कहा कि आई.आई.ए. जैसे संस्थाओं को सरकार के समक्ष ऐसी नीतियां प्रस्तुत करना चाहिये जिससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिले। श्री गर्ग ने कहा कि उद्यमियों को आर्थिक सहायता देने वाली प्रक्रिया काफी सरल कर दी है आवश्यकता है उद्यमियों को अच्छी सोच के साथ आगे बढ़कर उद्यम स्थापना करें।

इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष आई.आई.ए. ने कहा कि आई.आई.ए., इण्डिया फूड एक्सपो आने वाले समय में वृहद स्तर पर आयोजित करने की योजना बना रहा है। इसके साथ-साथ आई.आई.ए. कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना के लिए अपने हैड आफिस लखनऊ में एक सहायता केन्द्र की स्थापना भी करेगा और देश के जाने माने शोध संस्थानों के साथ अनुबन्ध कर उनके द्वारा ईजाद किये गये उत्पादों को उद्यमियों तक पहुंचायेगा।

डा. एस.वी.शर्मा संयुक्त निदेशक उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग उ.प्र. सरकार द्वारा अपने सम्बोधन में कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा खाद्य प्रसंस्करण नीति 2017 की जो घोषणा की है वह नीति देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अच्छी है। इस पाॅलिसी के अन्तर्गत सूक्ष्म एवं लघु खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां 5 वर्ष की अवधि में ढ़ाई करोड़ रुपये तक की सहायता प्राप्त कर सकती है। उ.प्र. में तीन मेगा फूड पार्क भी स्थापित किये जायेगे जिनमें से दो पर काम प्रारम्भ हो चुका है। इन मेगा फूड पार्कों में स्थापित होने वाली खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों को 10 प्रतिशत तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी। श्री शर्मा ने यह भी बताया कि वर्ष 2019-20 में एक अन्य महत्वकांक्षी योजना ‘‘ग्राम सम्पदा योजना’’ को लागू करने की तैयारी भी चल रही है।