नौटंकी कार्यशाला में प्रतिभागियों ने जानी नई बातें
‘नौटंकी रावणलीला उर्फ कलियुग की माया’ का मंचन 17 को

लखनऊ, 15 फरवरी। लोकनाट्य नौटंकी का स्वरूप बहुत बिगड़ गया है। इस विधा के सही रूप को कलाप्रेमियों के सम्मुख नये ढंग से लाने की कोशिश यहां नौटंकी पर आधारित प्रस्तुतिपरक कार्यशाला में नौंटंकी ‘रावणलीला उर्फ कलजुग की माया’ का प्रस्तुतीकरण 17 फरवरी को शाम छह बजे राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह कैसरबाग में होगा। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से ज्वाइन हैण्ड्स फाउण्डेशन के संयोजन में यह कार्य वरिष्ठ कला समीक्षक, लेखक रंगकर्मी राजवीर रतन के प्रस्तुतिकरण व निर्देशन में चल रही इस कार्यशाला में उनके साथ नक्कारा वादक सुनीलकुमार विश्वकर्मा, योगाचार्य अनूप निगम, गायक संगीतकार कमलाकांत मौर्य, लोक रंगकर्मी मेराज आलम, लोक नृत्यांगना ज्योति किरन, कथक नृत्यांगना ईशा रतन, राधेश्याम, आदि अभिनय, वाचन, नृत्य, मार्शल आर्ट प्रशिक्षण दे रहे हैं। नाट्यालेख डा.कुसुमकुमार का है। 

युवा प्रतिभागी गौरी यादव ने बताया कि बहुत से काम किये पर यहां मेरा मन ज़्यादा लग रहा है, मैं यहां मेक-अप और कास्टयूम के बार में सीख रही हूं। सहायक निर्देशक राज मल्होत्रा ने बताया कि मुझे सीता का किरदार भी मिला है, जो मेरे लिए चुनौती है। युवा पात्र का कहना है रंगमंच में खड़े होने का ढंग वाकई बहुत अलग होता है तो संवाद अदायगी में किन बातों का ख्याल रखना पड़ता है, इसका ज्ञान मुझे मिला। सुमित मिश्रा ने कहा कि मैं संगीत का विद्यार्थी हूं पर थियेटर सभी कलाओं का समन्वय है। रोहित ने बताया कि नौटंकी के बारे में जो कुछ भी जाना, उससे लगा कि मैं नौटंकी के बारे में बहुत गलत सोचता समझता था, ये तो हमारी परम्परागत लोक कला है। राधेश्याम ने कहा कि ये आलेख हम 25 वर्ष पहले करना चाहते थे पर खुशी है यह स्वप्न अब आकार ले रहा है।