पाकिस्तान को उसकी भाषा में ही जवाब
 

जैसी भाषा समझे, उस उसी की भाषा में समझाए जाना चाहिए। भारत ने पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया है। उसे सुधरने के मौके तो आजादी के बाद से आज तक वह कई बार दे चुका है। इसीलिए जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शांति का एक अवसर मांगा, तो एकबारगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हतप्रभ हो गए। उन्हें तत्काल जवाब नहीं सूझा लेकिन जब पाकिस्तान ने जैश की पुलवामा घटना में संलिप्तता के साक्ष्य मांगे तो प्रधानमंत्री ने सोच लिया कि पाकिस्तान अपनी पुरानी आदतों पर कायम है। से सबक सिखाना ही एकमेव रास्ता है। भारत पहले आक्रमण का कभी अभ्यस्त नहीं रहा लेकिन छेड़ने पर वह छोड़ता भी नहीं है। प्रधानमंत्री भी पाकिस्तान को कई बार इस बावत चेता चुके हैं लेकिन पाकिस्तान है कि मानने को तैयार ही नहीं है। उसकी सेना आए दिन सीमा पर सीज फायर का उल्लंघन करती है और उसके पालित-पोषित आतंकवादी भारत के अमन-चैन में खलल डालते रहते हैं। इस समस्या का समाधान भारत को करना तो था ही। वायुसेना ने जो पराक्रम किया है। पाकिस्तानी आतंकवादियों को उसके घर में घुसकर मारा है, उसकी जितनी भी सराहना की जाए, कम है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान की धरती पर आयोजित राजनीतिक सम्मेलन में कविता पढ़ी है कि 'सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं रुकने दूंगा। मैं देश नहीं झुकने दूंगा। मेरा वचन है भारत मां को तेरा शीश नहीं झुकने दूंगा, इस छल-फरेब की आंधी में मैं दीप नहीं बुझने दूंगा।’ वैसे तो यह कविता इससे पहले वे वर्ष 2०14 में भी पढ़ चुके हैं। पांच साल बाद इस कविता को पढ़ने की जरूरत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसलिए भी पड़ी क्योंकि पाकिस्तान समर्थित एक आतंकवादी ने 14 फरवरी को पुलवामा में आत्मघाती विस्फोट कर सीआरपीएफ के 44 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। इससे पूरे देश में नाराजगी थी। प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान के आतंकवादियों ने बहुत बड़ी गलती कर दी है, उसकी कीमत उसे चुकानी पड़ेगी। जब तक पाकिस्तान से बदला नहीं ले लिया जाता, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार पर पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे से मिटाने का दबाव पड़ रहा था लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की योजना, समय और स्वरूप तय करने की पूरी छूट पहले ही दे दी थी। इसी का नतीजा है कि भारतीय वायुसेना के जवान पाकिस्तान के अंदर पहुंचे और वे जैश -ए- मोहम्मद के कई आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को खत्म करने में कामयाब रहे। आतंकी सरगना मसूद अजहर के साले समेत तकरीबन 3०० आतंकवादियों और पाक सेना के 5 जवानों की उन्होंने जिदगी छीन ली। अगर प्रधानमंत्री देश को यह संदेश दे रहे हैं कि देश सुरक्षित हाथों में है तो कदाचित गलत भी नहीं है। 

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बारह दिन बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान सरकार, वहां की सेना और आतंकी संगठनों के चेहरे पर बारह बजा दिए हैं। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने जिस बालाकोट में सीआरपीएफ के जवानों पर हमले की रणनीति तैयार की थी, उस बालाकोट में हमला कर वायुसेना ने पाकिस्तान की चूलें हिला दी है। पाकिस्तानी संसद में वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ शर्म-शमã के नारे लगे। पाकिस्तान हमेशा ही इस बात से इनकार करता रहा है कि उसके देश में कोई भी आतंकी केंद्र नहीं चल रहा है लेकिन भारत ने अपने दो लक्षित हमलों के जरिए यह प्रमाणित करने की कोशिश की है कि पाकिस्तान और आतंक एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। भारत ने अपने दूसरे सर्जिकल स्ट्राइक में भी पाकिस्तानी नागरिकों को निशाना नहीं बनाया है। उसने केवल आतंकवादियों के प्रशिक्षण केंद्रों को ही हमला बनाया है। 

 

हालांकि भारत ने यह जवाबी कार्रवाई अपने आत्मरक्षा के अधिकार के तहत की है और अपनी कार्रवाई से अमेरिका और रूस को इस बावत जानकारी भी दे दी है। भारत कभी भी पाकिस्तानी अवाम पर हमले का पक्षधर नहीं रहा है। उसकी जगह दूसरा देश होता तो वह केवल पाकिस्तान को ज्यादा से ज्यादा नुकसान की कोशिश करता। जिस समय पाकिस्तान ने भारत पर परमाणु हमले की धमकी दी थी तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उसे चेताया था कि पाकिस्तान कान खोलकर सुन ले कि परमाणु हमले में हमारे किसी क्षेत्र के संभव है सारे लोग मारे जाएंगे लेकिन सुबह इस मंजर को देखने के पाकिस्तान में एक भी इंसान जिदा नहीं बचेगा। तब जाकर पाकिस्तान ठंडा पड़ा था लेकिन उसने उकसाने वाली भारत विरोधी गतिविधियां उसने हमेशा जारी रखीं। 

 

जब पाकिस्तान के वायु सेना प्रमुख इस बात का ट्वीट कर रहे थे कि पाकिस्तानी अवाम चैन से सोए क्योंकि पाक सेना चौकस है , जाग रही है लेकिन उसी रात प्रात: 3.5० बजे भारतीय वायुसेना के 12 मिराज-2००० लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्रों पर कहर बरपा कर उनके दींप का अंत कर दिया। मसूद अजहर के बड़े भाई इब्राहिम अजहर और साले के भी मारे जाने की खबर मिल रही है। बालाकोट पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में है और वहां जैश का सबसे बड़ा आतंकी प्रशिक्षण केंद्र था। उसे मसूद अजहर का साला यूसुफ अजहर चलाता था। 

बालाकोट के अलावा वायुसेना ने पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद और चकोटी इलाके में भी बमबारी की। 1००० किलो बम बरसाए, जैश का कंट्रोल रूम अल्फा-3 को उड़ाया और अपने काम को अंजाम देकर सकुशल भारतीय सीमा में लौट आई। इससे पहले 1971 की जंग और 1999 की कारगिल की जंग के वक्त भारतीय वायुसेना ने इस तरह की कार्रवाई की थी। दोनों ही मौकों पर भारत की कार्रवाई पाकिस्तान की सेना के खिलाफ थी। 

 

भारतीय सेना ने गुजरात में कच्छ के अब्दासा गांव में पाकिस्तान के खुफिया ड्रोन को भी मार गिराया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सरकार को 25०० आतंकवादियों के मारे जाने की सरकार और विपक्ष को सूचना दी है। यह भारतीय सैनिकों की बड़ी उपलब्धि है। वायुसेना की इस कार्रवाई से सीआरपीएफ के शहीद जवानों के परिजन ने भी राहत की सांस ली है। इस कार्रवाई से पूरा देश उत्साहित है। इस कार्रवाई की सफलता में खुफिया एजेंसियों की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने इसकी ठीक लोकेशन वायु सेना को मुहैया कराई थी। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर का ट्वीट बताता है कि पाकिस्तान इस हमले से बेहद तिलमिलाया हुआ है। पाकिस्तान में हमले के बाद भारतीय वायुसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पश्चिमी सीमा पर वायुसेना के जंगी जहाज गश्त कर रहे हैं। ये विमान पाक के जवाबी हमले की स्थिति में विमानों को भारतीय सीमा में घुसते ही उड़ा देने की क्षमता रखते हैं। पाक से सटी पश्चिमी सीमा पर जामनगर, उत्तरलाई, जैसलमेर, जोधपुर, फलौदी, नाल सहित पंजाब के सभी एयरबेस पर सुरक्षा व्यवस्था और चौकस कर दी गई है। 

विकथ्य है कि पुलवामा में फिदायीन हमले में सीआरपीएफ के 4० जवान शहीद हो गए थे। हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। हमले के बाद पाक ने बयान जारी करते हुए हमले में खुद का हाथ होने से इनकार किया था। 19 फरवरी को इमरान ने दावा किया था कि भारत अगर पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध कराता है, तो वह जैश-ए-मोहम्मद पर कार्रवाई करेंगे और अगर भारत ने अगर हमला किया तो पाक करारा जवाब देगा। हालांकि पाकिस्तानी सेना ने भारत पर ही आतंकवाद बढ़ाने के आरोप लगाए थे। ऐसे में पाकिस्तान से कोई उम्मीद ही नहीं थी कि वह आतंकवादियों के खिलापफ कार्रवाई करता। भारत ने अमेरिका और इजराइल के नक्शेकदम पर चलते हुए अपनी ठोस कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस दौरान उसने वायुसेना के जवानों की सुरक्षा का भी खास ध्यान रखा। प्रधानमंत्री खुद वार रूम में बैठे रहे और 21 मिनट तक जब तक ऑपरेशन चला, तब तक हर मूवमेंट की जानकारी लेते रहे। पाकिस्तानी हमले से अपनी जहाजों और जांबाज पायलटों को बचाए रखने की भी उन्होंने फूलप्रूफ व्यवस्था कर रखी थी। सेना की कार्रवाई यह बताती है कि प्रधानमंत्री बड़ी घटनाओं को भूलते नहीं हैं, बल्कि उसका समाधान तलाशते हैं। वह भी बेहद ठंडे दिल से। जब उन्होंने जनता से यह कहा था कि पुलवामा हमले के बाद जो आग आपके दिल में है, वही मेरे दिल में भी है तो भी विपक्ष ने उन पर तंज कसा था लेकिन आज की कार्रवाई ने मोदी विरोधियों को भी जय बोलने को विवश कर दिया है। मोदी की जयकार तो वे कर नहीं सकते। 

भारत के मिराज 2००० जेट का अवैक्स सिस्टम रक्षा कवच बना हुआ था। वह दुश्मनों की गतिविधि के बारे में उन्हें समय रहते अलर्ट कर रहा था। मतलब हवाई हमले के साथ ही भारत पाकिस्तान की तरफ से किसी भी पलटवार के लिए भी पूरी तरह तैयार था। भारत के पास इजरायली और इन्डिजनस अवैक्स सिस्टम है। इसे डीआरडीओ ने तैयार कर रखा है। वायुसेना की इस कार्रवाई ने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। मौजूदा समय सेना ही नहीं, हर देशवासी के लिए भी बेहद सतर्क रहने का है। भारत में भी पाकिस्तान समर्थक आतंकियों और उनके क्रीतदासों की बड़ी संख्या है। उनके प्रति भी सतर्क रहने की जरूररत है। जब तक पाकिस्तान में एक भी आतंकी जिदा है तब तक भारत के खुश होने का कोई कारण नहीं है। हम भारतीय को अपने बीच छिपे आस्तीन के नागों पर भी नजर रखनी होगी। पाकिस्तान का अगला कदम क्या होगा,इस पर सेना ही नहीं, हर भारतीय को नजर रखने की जरूरत है।