...अब 56 इंज सीना के खिलाफ चुनाव लड़ेगा रावण

नेरन्द्र मोदी के खिलाफ इतना आसान नहीं है वोटबैंक को साधना


लखनऊ। अब वाराणसी सीट से इस बार कांग्रेस पार्टी से नामुकिन से मुमकिन करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ भीम आर्मी प्रमुख एवं दलित नेता चन्द्रषेखर उर्फ रावण लेड़ेगा चुनाव। प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था िकवह 79 सीटो पर महागठबंधन का समर्थन करेंगे और एक सीट पर अपना उम्मीदवार उतारेगें। अलग-अलग नामों पर कयास लगाए जाने लगे और रावण द्वारा ऐलान किए जाने के बाद यह साफ हो गया कि वहीं लोकसभा चुनावों के आर्मी भीम सेना के प्रमुख चन्द्रषेखर उर्फ रावण को वाराणसी सीट से अपना कांग्रेस अपना समर्थन देगी। लगभग 28 लाख वोटरों वाली काशी संसदीय क्षेत्र में 80 हजार के आस-पास दलित वोटर्स हैं, जिसके दम पर चंद्रशेखर मैदान में उतरेंगे। लेकिन सपा और बसपा के संयुक्त गठबंधन में यह सीट सपा के पास है, जिस पर उम्मीदवार का नाम तय हो चुका है। ैऐसे में चंद्रशेखर को मुस्लिम और यादव वोट बैंक तो मिलने से रहा फिर भी उनका 80 हजार दलितों के दम पर नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतरना कितना सही रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रशेखर वाराणसी से चुनाव लड़कर लाइमलाइट में आना चाहते हैं और भविष्य में खुद को केंद्रीय राजनीति में सक्रिय करने के तहत ये कदम उठाना चाह रहे हैं। उनको पता है कि वाराणसी से चुनाव लड़ने पर मीडिया उनको अच्छी खासी कवरेज देगी।
गौरतलब है कि भीम आर्मी के संस्थापक और अध्यक्ष चंद्रशेखर उर्फ रावण के ऊपर से रासुका हटाने के योगी सरकार के फैसले के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया है। रात करीब 2 बजे जेल से बाहर निकलते ही चंद्रशेखर पुराने रंग में दिखे और ऐलान किया कि 2019 में भाजपा की सत्ता को उखाड़ फेंकेंगे। उनकी भीम आर्मी, जिसने बेहद कम समय में ही पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपना अच्छा खासा प्रभाव बना लिया।
2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों और सवर्णों के बीच हिंसा की एक घटना हुई। इस हिंसा के दौरान एक संगठन उभरकर सामने आया, जिसका नाम था भीम आर्मी। भीम आर्मी का पूरा नाम भारत एकता मिशन भीम आर्मी है और इसका गठन करीब 6 साल पहले किया गया था। इस संगठन के संस्थापक और अध्यक्ष हैं चंद्रशेखर, जिन्होंने अपना उपनाम रावण रखा हुआ है। पेशे से वकील चंद्रशेखर के परिवार में दो बहनें हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है और दो भाई हैं। चंद्रशेखर खुद भी अविवाहित हैं। उनका दूसरा भाई पढ़ाई के साथ-साथ एक मेडिकल स्टोर पर नौकरी करता है। एक चचेरा भाई है, जो इंजीनियर है।
9 मई 2017 को सहारनपुर के रामनगर में महापंचायत बुलाई। इस महापंचायत के लिए पुलिस ने अनुमति नहीं दी, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए महापंचायत की सूचना भेजी गई। सैंकड़ों की संख्या में लोग इसमें शामिल होने के लिए पहुंचे, जिन्हें रोकने के दौरान पुलिस और भीम आर्मी के समर्थकों के बीच संघर्ष हुआ और इसके बाद चंद्रशेखर के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।