चीनी मिलों में निजी निवेशकर्ताओं द्वारा लगभग रू.800 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश किया जाएगा

इन्टीग्रेटेड शुगर काॅम्प्लेक्स के रूप में विकसित करने के लिए इन दोनों
इन्टीग्रेटेड शुगर काॅम्प्लेक्सों के रूप में विकसित होने की दशा में इन
क्षेत्रों के गन्ना किसानों के सर्वागींण विकास के साथ-साथ प्रदेश को भी
विभिन्न प्रकार के शुल्क/ड्यूटी के रूप में राजस्व  प्राप्त  होगा।

 लखनऊ, 07 मार्च ।  पूर्व में कतिपय कारणों से बन्द दि किसान सहकारी चीनी मिल लि. मझोला जिला- पीलीभीत, उ.प्र. सहकारी चीनी मिल संघ लि. के स्वामित्व वाली मझोला डिस्टलरी एण्ड केमिकल वक्र्स तथा मझोला डिस्टलरी एण्ड केमिकल वक्र्स को किसानों के सर्वांगीण विकास तथा प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने हेतु इन्हें इन्टीग्रेटेड शुगर काॅम्प्लेक्सों के रूप में विकसित करने हेतु दीर्घकालीन लीज पर निजी निवेश कर्ता को हस्तान्तरित किये जाने का निर्णय लिया गया है। निजी निवेशकर्ता द्वारा एक ही परिसर में चीनी मिल/कोजनरेशन प्लान्ट एवं आसवनी की स्थापना कर इसको इंटीग्रेटेड शुगर काॅम्पलेक्स के रूप में विकसित करना अनिवार्य होगा। यह जानकारी देते हुए गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी ने बताया कि इस परियोजना की स्थापना पर होने वाला समस्त व्यय भार निजी निवेशक द्वारा वहन किया जायेगा। दोनों बन्द पड़ी चीनी मिलों को इंटीग्रेटेड शुगर काॅम्पलेक्स के रूप में विकसित करने के लिए निजी निवेशकों द्वारा प्रदेश में लगभग रु. 800 करोड़ का पूंजी निवेश किया जायेगा। निवेशक को टेण्डर एग्रीमेंट पूर्ण होने की तिथि से तीन वर्ष में परियोजना कर स्थापना कर संचालन करना अनिवार्य होगा। इन परियोजनाओं की स्थापना से चीनी मिल क्षेत्रों के किसानों की समृद्धि, क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा एवं प्रदेश के आर्थिक विकास को गति प्राप्त होगी। इन दोनों इन्टीग्रेटेड शुगर काॅम्प्लेक्सों की स्थापना से लगभग 160 लाख कुन्तल गन्ने की अतिरिक्त पेराई की जा सकेंगी तथा सहकारी चीनी मिलों की इन्टीग्रेटेड शुगर काॅम्पलेक्सों के रूप में विकसित होने वाली परियोजनाओं से लगभग 17,000 प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे साथ ही लगभग 50,000 गन्ना किसान भी इससे लाभान्वित होंगे तथा प्रदेश को विभिन्न प्रकार के शुल्क/ड्यूटी के रूप में राजस्व की प्राप्ति भी होगी।