क्यों हो रही सेना के शौर्य पर राजनीति

मजबूती से खड़ा है भारत अपनी सेनाओं के साथ


देश में सेना के शौर्य पर सवाल उठाने वालों में कई सैम पित्रौदा भरे पड़े हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक किए जाने के बाद ने सरकार पर हमला बोला था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि इंटरनेशल मीडिया कह रहा है कि कोई आतंकी नहीं मारा गया है और इस पर जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने ट्वीट कर केंद्र सरकार पर आतंक के राजनीतिकरण का दोषी होने का आरोप लगाया था। पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा था कि भारतीय वायुसेना के वाइस एयर मार्शल ने हताहतों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि कोई नागरिक या सैनिक हताहत नहीं हुआ तो हताहतों की संख्या 300-350 किसने बताई?


सेना पर सवाल उठाने वालों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पीछे रहने वाली नहीं हैं। उन्होने मोदी सरकार से एयर स्ट्राइक पर मीडिया में आयी खबरों का जिक्र करते हुए कहा कि कई विदेशी मीडिया ने खबर दी है कि हवाई हमले से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, तो देश को यह जानने का हक है कि बालाकोट में हवाई हमले के बाद वाकई क्या हुआ। ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर शहीद जवानों के खून से राजनीति करने का बड़ा आरोप लगा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को पुलवामा में आतंकी हमले के बारे में पहले से जानकारी थी, फिर भी जवानों को हवाई मार्ग की बजाए सडक़ मार्ग से क्यों भेजा गया। 


पुलवामा हमले को लेकर समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव ने पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर हुए आतंकी हमले को साजिश करार दिया और कहा कि वोट के लिए हमारे जवानों को मार दिया गया। जब सरकार बदलेगी तो इस हमले की जांच की जाएगी, तब बड़े-बड़े लोग इसमें फंसेंगे। रामगोपाल यादव ने कहा अर्धसैनिक सुरक्षाबल सरकार से दुखी हैं। वोट के लिए जवान मार दिए गए। नेशनल कॉन्फ्रेस के बारामुला से प्रत्याशी अकबर लोन ने कुपवाड़ा में एक सभा में कहा कि अगर कोई पाकिस्तान को एक गाली देगा, तो मैं उनको यहां से 10 गालियां दूंगा। रामगोपाल यादव से पूर्व उनकी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव,  महबूबा मुफ्ती, फारूक  अब्दुल्ला, शरद पवार, सीताराम येचुरी, शरद यादव, मायावती, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू, माकपा नेता वृंदा करात जैसे कई नेता सेना पर सवाल उठाते रहते हैं।


सैम पित्रोदा के बयान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुये कहा कहा है कि विपक्ष हमारे सुरक्षाबलों का बार-बार अपमान करता है। मोदी ने कहा कि मैं अपने साथी भारतीयों से अपील करता हूं कि विपक्षी नेताओं से उनके बयानों को लेकर सवाल करें। उन्हें बताएं कि 130 करोड़ भारतीय विपक्ष को उनकी हरकतों के लिए माफ नहीं करेंगे और ना भूलेंगे। भारत अपनी सेनाओं के साथ मजबूती से खड़ा है।  


लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है। प्रथम चरण के मतदान के लिये नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे में कांग्रेस के एक बड़े नेता सैम पित्रोदा ने पुलवामा हमले पर बड़ा बयान देकर कांग्रेस को बचाव की मुद्रा में ला दिया है। पित्रोदा ने कहा कि पुलवामा हमले के लिए पूरे पाकिस्तान पर आरोप लगाना सही नहीं है। साथ ही उन्होंने मुंबई हमले के लिए पूरे पाकिस्तान को दोषी बताने को भी गलत करार दिया है। उन्होने कहा कि कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे देश को नहीं दी जानी चाहिए। इसी तरह मुंबई में हुये 26/11 के आतंकी हमला करने के लिये पाकिस्तान से 8 लोग आते हैं और हमला कर देते हैं। इसके लिए पूरे पाकिस्तान देश पर आरोप नहीं लगा सकते है। मैं नहीं मानता कि यह सही तरीका है।


सैम पित्रौदा ने एयरस्ट्राइक पर सवाल उठाते हुए कहा कि अखबारों में छपी इस खबर को जितना पढ़ा उसके बारे में और ज्यादा जानना चाहता हूं। क्या हमने वाकई में हमला किया। हम वाकई में 300 लोगों को मारा। एयरस्ट्राइक में मारे गए आतंकियों के दावे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि अगर आप कहते हैं कि 300 लोग मारे गए। तो हर किसी और हर भारतीय को इसके बारे में जानने की जरुरत है। विश्व के मीडिया में तो कोई नहीं मारा गया जैसी खबरें आने के बाद बतौर भारतीय नागरिक मुझे बहुत बुरा लग रहा है।


सैम पित्रोदा कोई छोटा कांग्रेसी नेता नहीं है जिनके बयान का महत्व नहीं हो। गांधी परिवार के बेहद करीबियों में शामिल सैम पित्रौदा अभी इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। वो इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी तक के करीबी व विश्वासपात्रो में शुमार किये जाते रहें हैं। पूर्व में वो राजीव गांधी के प्रधानमंत्री काल में उनके निजी सहायक रहें हैं। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में पित्रोदा 2005 से 2009 तक ज्ञान आयोग के चेयरमैन रह चुके हैं। 2009 में उन्हे पद्म भूषण से नवाजा गया था। सैम पित्रोदा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को राजनीतिक सलाह देने का काम भी करते हैं। राहुल की छवि में आए बदलाव का श्रेय भी कांग्रेस के कई नेता पित्रोदा को ही देते हैं। राजीव गांधी की मौत के बाद सैम ने कहा था कि मैंने अपना सबसे प्यारा दोस्त खो दिया। 2010 में उन्हे प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह का केबीनेट मंत्री के दर्जे के साथ सार्वजनिक सूचना अवसंरचना और नवाचार का सलाहकार नियुक्त किया गया था। इससे समझा जा सकता है कि पित्रोदा राहुल गांधी के कितने करीबी है। पित्रोदा के बयान से कांग्रेस को चुनावो में परेशानी उठानी पड़ेगी क्योंकि प्रधानमंत्री अपने चुनावी अभियान में उनके बयान हर संभव भुनाने का प्रयास करेगें।


पंजाब की कांग्रेस सरकार में मंत्री नवजोत सिद्धू ने मोदी सरकार से पूछा था कि 300 आतंकवादी मरे, हां या नहीं? या फिर 300 पेड़ गिराये गये थे। उन्होंने कहा था कि सेना का राजनीतिकरण बंद होना चाहिए।  पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक के सबूत जारी करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि जिस तरह अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन के खिलाफ कार्रवाई के सबूत जारी किए थे, उसी तरह हमें भी सबूत जारी करने चाहिए। कांग्रेस में बी के हरिप्रसाद, रणदीप सुरजेवाला, संदीप दीक्षित, मनीष तिवाड़ी, गुलामनबी आजाद, मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर, सलमान खुर्शीद, राजब्बर, रेणुका चौधरी, आनन्द शर्मा जैसे अनेक नेता भरे पड़े है जो अनायास ही अपने बिगड़े बोल से कांग्रेस को शर्मसार करते रहते हैं। 


पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुये कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और मार्गदर्शक ने आज मान लिया जो देश के लोग पहले से जानते हैं। कांग्रेस आतंकियों को जवाब देने के लिए तैयार नहीं थी। मगर अब नया भारत है हम आतंकियों को उनकी भाषा में ही जवाब देंगे। सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के बयान पर पीएम मोदी ने निशाना साधा और कहा कि रामगोपाल यादव जैसे वरिष्ठ नेता का निंदनीय बयान उन सभी का अपमान है जिन्होंने कश्मीर की रक्षा में अपनी जान दी है। यह हमारे शहीदों के परिवारों को अपमानित करने वाला है।


पुलवामा और बालाकोट की घटनाओं पर विपक्ष के टेढ़े बोल पर लोगो का मानना है कि विपक्ष के बोल उसके हित में नहीं हैं। उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सुदूर गांवों तक इन घटनाओं ने लोगों के मानस पर असर डाला है। अब इसको लेकर विपक्ष ऊटपटांग बयानबाजी करता है तो यह उसके खिलाफ जा सकता है। कांग्रेस का ऐसा स्टैंड आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई को निश्चित रूप से कमजोर करने वाला है और यह सारे देश के लिए बड़ी चिंता की बात है।


कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश का अगला प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहें हैं वहीं उनकी ही पार्टी के बयानवीर नेता उनके मंसूबो को तोडऩे में लगे हैं। राहुल गांधी को सबसे पहले अपनी पार्टी के उन बड़बोले नेताओं पर बयान देने पर रोक लगानी होगी जो अनर्गल बयानबाजी कर कांग्रेस को बैकफुट पर खड़ा कर देते हैं। इस चुनावी माहौल में हर बयान का महत्व होता है ऐसे में सैम पित्रौदा, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, पी.चिदम्बरम, कपिल सिब्बल जैसे नेताओं को काबू में रखना होगा ताकि कांग्रेस को और अधिक सफाई ना देनी पड़े। देश के लोगो को सेना पर पूरा विश्वास है ऐसे में भाजपा विरोधी दलों द्वारा जोश में आकर सेना की भूमिका पर सवाल करने को देश का आम आदमी गैर जरूरी मानता है। ऐसे में राजनीतिक दलों को सेना पर सियासत करने से परहेज करना चाहिये।