मुख्यमंत्री ने बार काउन्सिल के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सम्मानित किया
अधिवक्ता सम्मान समारोह’ प्रदेश में पहली बार 05 दशक की सेवा करने वाले 

वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सम्मानित किया जा रहा है: मुख्यमंत्री

राज्य सरकार अधिवक्ताओं के 03 प्रमुख मुद्दों का समाधान निकालने में सफल रही 

60 वर्ष से कम आयु में दिवंगत होने वाले वकीलों के परिजनों को दी जाने वाली 

05 लाख रु0 की सहायता राशि की आयु सीमा बढ़ाकर 70 वर्ष की गई

40 वर्ष की आयु के उपरान्त पंजीकृत अधिवक्ताओं को मिलने वाली 50 हजार रुपए की सहायता राशि की आयु सीमा को 

60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष तक करने का निर्णय

युवा अधिवक्ताओं के लिए शुरुआती 03 वर्ष तक पुस्तक खरीदने के लिए 05 हजार रु0 की राशि प्रतिवर्ष देने की मांग भी मंजूर

 

 

मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं से न्याय मित्र (प्रो बोनो) के माध्यम से समाज के गरीब एवं निर्बल व्यक्तियों के मुकदमों की पैरवी करने का अनुरोध किया

 

लखनऊ: 09 मार्च। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने कहा है कि राज्य सरकार अधिवक्ताओं के 03 प्रमुख मुद्दों का समाधान निकालने में सफल रही है। बहुत दिनों से प्रदेश के अधिवक्ताओं की मांग हुआ करती थी कि 60 वर्ष से कम आयु में दिवंगत होने वाले वकीलों के परिजनों को दी जाने वाली 05 लाख रुपए की सहायता राशि की आयु सीमा बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी जाए। उन्होंने कहा कि कल प्रदेश मंत्रिपरिषद ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया है और इसकी आयु सीमा 70 वर्ष कर दी गई है। इसके साथ ही, 40 वर्ष की आयु के उपरान्त पंजीकृत अधिवक्ताओं को मिलने वाली 50 हजार रुपए की सहायता राशि की आयु सीमा को 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष तक करने का निर्णय सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से किया है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा अधिवक्ताओं के लिए शुरुआती 03 वर्ष तक पुस्तक खरीदने के लिए 05 हजार रुपए की राशि प्रतिवर्ष देने की मांग को भी प्रदेश कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए नोडल एजेन्सी के रूप में बार काउन्सिल द्वारा लाभार्थियों की सूची प्रदान कराई जाएगी। यह धनराशि सीधे युवा अधिवक्ता के खाते में ई-पेमेण्ट के माध्यम से अन्तरित कर दी जाएगी।  

मुख्यमंत्री आज यहां लोक भवन में आयोजित ‘अधिवक्ता सम्मान समारोह’ को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 05 दशकों तक लगातार सेवा करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सम्मान किया। उन्होंने बार काउन्सिल के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री जी ने इस अवसर पर प्रदेश के विधायी विभाग की नई वेबसाइट को भी लाॅन्च किया।

मुख्यमंत्री  ने कहा कि वरिष्ठजन का सम्मान करना, उन्हें आदर देना, उनके मूल्यों और आदर्शों से प्रेरणा प्राप्त करना हमारी परम्परा रही है। आज प्रदेश में पहली बार 05 दशक की सेवा करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने इन अधिवक्ताओं के स्वस्थ और सुदीर्घ जीवन की कामना करते हुए यह विश्वास व्यक्त किया कि इनके लम्बे अनुभव का लाभ प्रदेश को मिलता रहेगा।  

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अधिवक्ताओं ने अपने कार्य और व्यवहार से लोगों का विश्वास अर्जित किया है। व्यक्ति अपने वकील पर पूरा भरोसा करता है। विश्वसनीयता के संकट वाले वर्तमान समय में जब खून के रिश्ते में विभेद हो, अविश्वास का भाव हो, ऐसे में वकालत के पेशे को विश्वसनीयता की कसौटी पर खरा उतरता दिखाई देना अभिनन्दनीय है।  

मुख्यमंत्री  ने कहा कि अधिवक्ताओं ने जागरूकता पैदा करके सम-विषम परिस्थितियों में समाज का मार्गदर्शन किया। स्वाधीनता आन्दोलन तथा स्वाधीन भारत को दिशा दिखाने में अधिवक्ताओं ने पहल की। उनकी डाली नींव पर आज हमारा देश विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में गौरवान्वित हो रहा है। भारत के संविधान के तहत देश के प्रत्येक नागरिक को किसी जाति, मत-मजहब, क्षेत्र या लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि समता के आधार पर सारे अधिकार मिले हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि प्रदेश के न्यायिक प्रक्रियाओं से जुड़े सभी विषयों का त्वरित समाधान होना चाहिए। इसलिए प्रदेश सरकार ने सम्बन्धित प्रकरणों को आगे बढ़ाने का कार्य किया। नवीन न्यायालयों की स्थापना के साथ अधिवक्ताओं के लिए चैम्बर, वादकारियों के बैठने की व्यवस्था, अच्छी लाइब्रेरी की उपलब्धता पर ध्यान देने के साथ ही, बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें समय के अनुसार आगे बढ़ना है। इसलिए तकनीक का उपयोग करके वादकारियों को लाभ दिया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी तथा केन्द्रीय कानून एवं न्याय मंत्री  रविशंकर प्रसाद के प्रयासों से केन्द्रीय विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा अनेक अभिनव पहल की गई हैं। इनमें टेली लाॅ का मोबाइल एप, आॅनलाइन मीडिएशन फाॅर गवर्नमेण्ट लिटिगेशन, न्यायपालिका की आधारभूत सुविधाओं को सी.एस.एस. के द्वारा माॅनीटर करना आदि शामिल है। भारत सरकार ने अनेक अनुपयोगी अधिनियमों को निरसित किया है। प्रदेश सरकार ने भी अनेक अनुपयोगी अधिनियम निरसित किए हैं। प्रदेश सरकार द्वारा आज लाॅन्च की गई नवीन वेबसाइट पर उत्तर प्रदेश सरकार के वर्ष 1975 से लेकर अब तक प्रख्यापित 1054 अधिनियमों को अपलोड करते हुए एक नई शुरुआत की गई है।  

मुख्यमंत्री  ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अधिवक्ताओं से न्याय मित्र (प्रो बोनो) के माध्यम से समाज के गरीब एवं निर्बल व्यक्तियों के मुकदमों की पैरवी करने का अनुरोध किया है। प्रो बोनो व्यवस्था को एप के द्वारा भी संचालित किया गया है। गरीब, वंचित, शोषित और उपेक्षित वर्गों के लोग धन के अभाव में न्याय से वंचित न रहने पाएं। इसके दृष्टिगत मुख्यमंत्री जी ने अधिवक्ताओं से अधिकाधिक प्रो बोनो के माध्यम से समाज की सेवा करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री  ने वरिष्ठ अधिवक्तागण-एन0के0 सेठ, राम नारायण गुप्ता, सुबोध कुमार शुक्ला, सुरेश चन्द्र श्रीवास्तव,  टी0एन0 गुप्ता,  बी0सी0 अग्रवाल,  आर0ए0 उपाध्याय तथा  यू0के0 श्रीवास्तव को सम्मानित किया। उन्होंने बार काउन्सिल के सदस्य  अमरेन्द्र नाथ मिश्र,  प्रशान्त सिंह अटल,  अखिलेश अवस्थी,  अजय शुक्ला,  पांचू राम मौर्य, प्रदीप कुमार सिंह,  जय नारायण पाण्डेय,  देवेन्द्र मिश्र नगराहा तथा  जानकी शरण पाण्डेय को भी सम्मानित किया।

इसके पूर्व, प्रदेश के विधायी एवं न्याय मंत्री बृजेश पाठक ने अपने सम्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री  ने यह निर्णय लिया कि प्रदेश सरकार द्वारा अधिवक्ताओं को सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज के पीड़ित और वंचित व्यक्तियों को अपनी जिम्मेदारी समझकर न्याय दिलाने का कार्य करते हैं। उन्हांेंने विधि और न्याय के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। प्रदेश के महाधिवक्ता  राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री  की पहल पर राज्य में पहली बार सरकार द्वारा अधिवक्ताओं को सम्मानित किया जा रहा है। 

कार्यक्रम में आभार व्यक्त करते हुए विधायी एवं न्याय तथा सूचना राज्यमंत्री डाॅ. नीलकण्ठ तिवारी ने अधिवक्ताओं के हित में आयु सीमा की वृद्धि करने के लिए मुख्यमंत्री  को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपनी समस्या अधिवक्ता को सौंपकर निश्चिन्त हो जाता है और वकील पीड़ित व्यक्ति की समस्या को अपनी समस्या समझते हुए उस व्यक्ति को न्याय दिलाता है।

इस अवसर पर मुख्य सचिव डाॅ. अनूप चन्द्र पाण्डेय, प्रमुख सचिव न्याय  डी.के. सिंह, प्रमुख सचिव विधायी  संजय खरे, सूचना निदेशक  शिशिर, बार काउन्सिल एवं बार एसोसिएशनों के पदाधिकारीगण एवं अधिवक्तागण उपस्थित थे।