स्वीकृत प्रजाति गन्ने से विस्थापित करने के निर्देश

लखनऊ, 2 मार्च।   प्रदेश के कतिपय परिक्षेत्रों में अस्वीकृत प्रजाति का गन्ना अधिक विद्यमान है जिससे वहाॅ की औसत उपज एवं चीनी परता अपेक्षाकृत कम प्राप्त होता है जिससे चीनी मिलें भुगतान में  हीलाहवाली करती हैं। परन्तु कतिपय कृषकों द्वारा अभी भी अस्वीकृत प्रजाति के गन्ने की बुवाई निरंन्तर की जा रही है ।  उसकी पेड़ी प्राप्त की जा रही हैं। प्रदेश के चीनी मिल कुन्दरकी, इटईमैदा, रूधौली, हैदरगढ़, प्रतापपुर, पिपराईच, बेलरायाॅ, सठियाव, घोसी, देवबन्द, गागनौली, गागलहेड़ी एवं टोडरपुर में गन्ने की कम उपलब्धता तथा अस्वीकृत प्रजातियों का आच्छादन अधिक होने के दृष्टिगत अस्वीकृत प्रजातियों के विस्थापन तथा गन्ना क्षेत्रफल एवं उत्पादकता बढ़ाये जाने के दृष्टिगत सम्बन्धित गन्ना विकास परिषदों एवं चीनी मिलों द्वारा संयुक्त रूप से विकास कार्यक्रम तैयार कर क्रियान्वित किये जाने के निर्देश दिये गये है।    आयुक्त, गन्ना एवं चीनी श्री संजय आर. भूसरेड्डी ने बताया कि सम्बन्धित कार्ययोजना की तैयारी, क्रियान्वयन सम्बन्धित जिला गन्ना अधिकारी उत्तरदायी होगें तथा उक्त के संबंध में स्थानीय गन्ना शोध केन्द्र के वैज्ञानिक भी यथाआवश्यक सहयोग करेगें। इसकी समीक्षा मुख्यालय स्तर पर अधोहस्तारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा की जायेगी।


चीनी मिल को गन्ने की आवश्यकतानुसार बसन्तकालीन बुवाई हेतु निर्धारित क्षेत्रफल में बुवाई का कार्यक्रम तैयार करना एवं अनुपयुक्त प्रजाति के गन्ने एवं शत-प्रतिशत पूर्ति। उक्त हेतु चीनी मिल के गन्ना प्रबन्धक एवं ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक का संयुक्त उत्तरदायित्व होगा। चीनी मिल परिक्षेत्र से बाहर अन्य प्लाट, प्रदर्शन एवं पौधशालाओं से स्वस्थ गन्ना बीज उपलब्ध कराना एवं समय-समय पर इसकी साप्ताहिक समीक्षा करना तथा चीनी मिल के गन्ना प्रबन्धक एवं ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक के मध्य समन्वय स्थापित कर ससयम लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति करने की जिम्मेदारी जिला गन्ना अधिकारी की होगी। अस्वीकृत प्रजातियों के विस्थापन गन्ना क्षेत्रफल एवं उत्पादकता बढ़ाये जाने के दृष्टिगत सम्बन्धित गन्ना विकास परिषदों एवं चीनी मिलों द्वारा संयुक्त रूप से विकास कार्यक्रम तैयार कर क्रियान्वित किये जाने के निर्देश दिये गये है। जिला गन्ना अधिकारी द्वारा कार्ययोजना की तैयारी, क्रियान्वयन कि जायेगा तथा समीक्षा मुख्यालय स्तर पर गठित कमेटी द्वारा की जायेगी। पेराई सत्र 2019-20 में स्वीकृति प्रजाति के अनुसार बसन्तकालीन गन्ना बुवाई कार्यक्रम निर्धारित। चीनी मिल परिक्षेत्र से बाहर अन्य प्लाट, प्रदर्शन एवं पौधशालाओं से बीज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जिला गन्ना अधिकारी की होगी ।


 जनपद से बाहर गन्ना बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराना तथा सभी पक्षों का आपस में समन्वय स्थापित कर पाक्षिक रूप से लक्ष्यों की समीक्षा एवं पूर्ति प्राप्त करने की जिम्मेदारी उप गन्ना आयुक्त की होगी। निदेशक,उ.प्र. गन्ना शोध परिषद, शाहजहाॅपुर द्वारा सम्बन्धित चीनी मिल हेतु वैज्ञानिक नामित करना, विभाग व चीनी मिल को प्रजातीय विस्थापन हेतु सुझाव, बीज का उपचार, बीमारियों की रोक-थाम हेतु निरीक्षण करना तथा बीज की कमी होने पर शोध प्रक्षेत्रों से उपलब्धता सुनिश्चित कराने का उत्तरदायित्व होगा। उप निदेशक, गन्ना किसान संस्थान द्वारा इन चीनी मिलोके क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर, विभागीय योजनाओं, ट्रैंच विधि, सहःफसली खेती, गन्ने की उन्नतशील प्रजातिया, विभागीय नीतियों एवं निर्देशों का प्रचार-प्रसार करायेगें।