उत्तर प्रदेश विधान परिषद के इतिहास का देश के स्वाधीनता संग्राम से अट्टू संबध रहा है:  रमेश यादव
 

 

लखनऊः 16 मार्च । विधान परिषद के सभापति  रमेश यादव ने कहा कि हम जिस सदन की सार्थकता पर चर्चा कर रहे है निश्चय ही इसका अतीत और इतिहास बहुत ही गौरवशाली है। इसके कई माननीय सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम ही नहीं अपितु उसके पश्चात स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण हेतु गठित संविधान सभा में भी सदस्य के रूप में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के इतिहास का देश के स्वाधीनता संग्राम से अटूट रूप से संबध रहा है। एक ओर इसने स्वतंत्रता की यज्ञ-ज्योति से प्रेरणा और स्फूर्ति प्राप्त की तो दूसरी ओर इसमें मूल्यवान आहूतियां देकर उस ज्योति को अधिक प्रखरता से प्रज्जवलित करके उसे पुष्ट और तुष्ट किया है। 
सभापति ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने राष्ट्रीय समस्याओं के परिपेक्ष्य में उनके निराकरण में जो महती भूमिका निभाई है वह गौरवमयी, अनुकरणीय और स्तुत्य है। इसके सदस्यों में विद्वतजनों के समायोजन का ऐसा तत्व रहा है जिसने इसके विकास को जहां एक ओर बढ़ाया वहीं दूसरी ओर इसके कार्यकलापों को विद्या, विवेक और ज्ञान से पूरित किया। 


 

 

प्रमुख सचिव विधान परिषद डा. राजेश सिंह ने संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन के विभिन्न पहलू ऐसे होते हैं जिन पर सदन में गंभीरता, दूरदृष्टि, स्पष्ट तथा निष्पक्ष भाव से विचार करने की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने अपना योगदान सिर्फ सदन तक ही सीमित नहीं रखा है अपितु मिनी सदन अर्थात संसदीय समितियों के माध्यम से भी उत्तर प्रदेश विधान परिषद में अपनी सार्थकता सिद्ध की है। 

इस संगोष्ठी में कई विधान परिषद सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किये संगोष्ठी का समापन करते हुए सभापति  रमेश यादव ने संगोष्ठी में आये हुए सभी विधान परिषद सदस्यों एवं अतिथियों का अभार प्रकट किया। 

इस अवसर पर विधि एवं न्याय मंत्री  ब्रजेश पाठक, विधान परिषद सदस्य शतरूद्र प्रकाश, प्रमुख सचिव विधानसभा श्री प्रदीप दुबे सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।