लेखपाल  भर्ती में धांधली  आयोग के पूर्व अध्यक्ष पर केस

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष राज किशोर यादव समेत सात लोगों पर सोमवार को हजरतगंज कोतवाली में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया। उन पर मानकों की अनदेखी कर लेखपालों की भर्ती करने का आरोप है।  इंस्पेक्टर हजरतगंज राधा रमण सिंह ने बताया कि भर्ती  की जांच शासन स्तर से हुई थी। जिसकी रिपोर्ट आने पर कई लोग जांच के घेरे में आये थे। सोमवार को चकबंदी उप संचालक उमेश गिरी ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष राज किशोर यादव पर केस दर्ज करने की तहरीर दी थी। पूर्व अध्यक्ष के साथ ही चयन बोर्ड में रहे सुरेश यादव, बबीता देवी लाठर, अब्दुल गनी, विनय श्रीवास्तव, केशवराम व महेश प्रसाद भी आरोपी हैं।
  वर्ष 2015-16 में चकबंदी लेखपाल के 2831 पदों पर भर्ती में अनियमितता की जांच  धोखाधड़ी व दस्तावेजों में हेरफेर करने की धारा में मुकदमा दर्ज कर की जा रही है। इससे पहले भी चकबंदी विभाग की तरफ से तीन मुकदमें दर्ज कराये जा चुके हैं। 
इंस्पेक्टर हजरतगंज राधा रमण सिंह ने  बताया कि उपसंचालक की तरफ से दी गई शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है। पहले से चल रही जांच में नई एफआईआर को भी शामिल किया जायेगा। 
 अधीनस्थ सेवा आयोग के अध्यक्ष रहे राज किशोर यादव ने अप्रैल 2017 में पद से इस्तीफा दे दिया था। अचानक पद छोड़ने के फैसले को लेकर काफी चर्चा भी हुई थी। वहीं, लेखपाल भर्ती समेत कई अन्य भर्तियों में धांधली होने की बात भी सामने आई थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच कराने के आदेश दिये थे। मामला हाथ से निकलने पर राज किशोर यादव ने पद छोड़ दिया था।  
वर्ष 2015-16 में चकबंदी लेखपाल के लिये 2831 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था। चकबंदी निदेशालय ने आयोग को  सामान्य वर्ग के 1901, एससी के 50, एसटी के 63 व ओबीसी के 769 अभ्यर्थियों के चयन का प्रस्ताव दिया था। उसके बाद आयोग ने 2,831 की जगह 2,783 अभ्यर्थियों का चयन कर चयन सूची चकबंदी आयुक्त को भेजी थी। उसमें सामान्य वर्ग के 1,901 के स्थान पर 920, एससी के 50 के स्थान पर 104, एसटी के 64 के स्थान पर 65 व ओबीसी के 769 के स्थान पर 1694 अभ्यर्थियों के नाम  थे। ओबीसी वर्ग के 925 अभ्यर्थी अधिक चयनित किए गए थे।