संत कबीर की धरती से देश को मिली पहली महिला मुख्यमंत्री  

संतकबीर नगर। देश को पहली महिला मुख्यमंत्री कबीर की धरती ने दी। 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने वाली सुचेता कृपलानी 1962 के चुनाव में खलीलाबाद नार्थ (मौजूदा मेंहदावल, जनपद संतकबीरनगर) सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा में पहुंची थीं। उन्हें इस सीट से लड़ने का न्योता उस समय मेंहदावल से विधायक रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजाराम शर्मा ने दिया था। मेंहदावल से 1951 और 1957 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाले राजाराम शर्मा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, आचार्य कृपलानी और सुचेता कृपलानी को पत्र लिखकर चुनाव लड़ने का अनुरोध किया था। पत्र में भरोसा दिलाया था कि उन्हें सबसे अधिक मतों से चुनाव जिताकर भेजा जाएगा। ऐसे में उनके इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया और सुचेता कृपलानी ने यहां से पर्चा दाखिल कर दिया। मेंहदावल कस्बे के बुजुर्ग कांग्रेसी गोपाल मिश्र बताते हैं कि उनके चुनाव की कमान राजाराम शर्मा के अलावा बदरी सेठ और गब्बू लाल गुप्ता ने संभाली थी।


स्वतंत्रता सेनानी धनुषधारी पाण्डेय, रामशंकर लाल और कृपाशंकर लाल भी उनके साथ जनसम्पर्क में रहते थे। पूर्व सांसद केसी पाण्डेय बताते हैं कि उस समय वे वेणी माधव गोपीनाथ इण्टर कालेज में कक्षा नौ के छात्र थे। चुनाव में सुचेता कृपलानी पैदल ही लोगों से सम्पर्क करती थीं। वे महिलाओं से मिलती थीं और उन्हें घूंघट की ओट से निकल कर कुछ करने के लिए उत्साहित करती थीं। जनसम्पर्क के दौरान वे महिलाओं से बेटियों को स्कूल भेजने का अनुरोध करना नहीं भूलती थी। वे मेंहदावल में जब भी आती तो बदरी सेठ और गब्बू लाल गुप्ता के घर पर ही रुकती थीं।      


विधायक बनने के करीब आठ महीने बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त के इस्तीफा देने पर 2 अक्टूबर 1963 को सुचेता कृपलानी मुख्यमंत्री बनीं। वे 13 मार्च 1967 तक इस कुर्सी पर रहीं। उन्होंने ही पूर्वांचल में औद्योगिक विकास की शुरुआत की। 20 मई 1962 को उन्होंने खलीलाबाद कस्बे में औद्योगिक आस्थान की नींव रखी थी। उस समय तक औद्योगिक विकास के लिए नोयडा और गीडा का कहीं कोई अता-पता नहीं था।  


1962 का आम चुनाव आते-आते जनसंघ भी उभरने लगा था। मेंहदावल में सुचेता कृपलानी को जनसंघ के प्रत्याशी चंद्रशेखर सिंह ने कड़ी टक्कर दी थी। वे मात्र 3948 मतों से ही चुनाव जीत पाई थीं। उन्हें 24 हजार 424 वोट मिले थे जबकि जनसंघ के चंद्रशेखर सिंह को 20 हजार 476 वोट मिले थे। इन दोनों के अलावा तीन और प्रत्याशी थे जिनकी जमानत जब्त हो गई थी। 


सुचेता कृपलानी का जन्म 25 जून 1908 को हुआ। उनकी शिक्षा लाहौर और दिल्ली में हुई थी। आजादी के आंदोलन में भाग लेने के लिए उन्हें जेल की सजा हुई। 1946 में वह संविधान सभा की सदस्य चुनी गई। 1958 से 1960 तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव थी। सुचेता कृपलानी उन चंद  महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने बापू के करीब रहकर देश की आजादी की नींव रखी। वह  1946 में बापू की नोवाखली यात्रा में उनके साथ थीं। वर्ष 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने से पहले वह लगातार दो बार लोकसभा के लिए चुनी गईं।  उनका निधन 1 दिसंबर 1974  को हुआ।