अमेरिकी ने भारत सहित आठ देशों को ईरान से तेल खरीदने पर लगा दी है रोक

 ...अब भारत में तेल संकट 
भारत सहित आठ देशों द्वारा ईरान से तेल खरीदने की अमेरिका की मियाद आज गुरुवार को पूरी होने जा रही है। ऐसे में भारत द्वारा शीघ्र ही दूसरा रास्ता तैयार पड़ेगा। अमेरिका ने भारत सहित आठ देशों-जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, तुर्की, इटली, यूनान और चीन को ईरान से कच्चा तेल खरीदने की रियायत दी थी। हालांकि भारत और ईरान के बीच संबंध प्रगाढ़ हैं। भारत अपनी जरूरतों का 80 फीसदी तेल बाहर से खरीदता है। सबसे ज्यादा तेल की खरीददारी ईरान से होती है। अमेरिका को लगता है कि ईरान चोरी-छिपे परमाणु हथियार विकसित कर रहा है। इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत सहित आठ देशों को ईरान से तेल खरीदने पर रोक लगा दी है। 
ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा ईरान के साथ किए गए समझौते को खत्म कर दिया था। आज की स्थिति में अगर भारत ईरान से तेल खरीदना बंद कर दे तो देश के ऊर्जा क्षेत्र और आर्थिक सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसका एक उपाय यह है कि भारत ईरान से तेल निर्भरता घटाकर अन्य खाड़ी देशों से समझौता कर ले। हालांकि यह भी तय है कि इससे भारत-ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल असर होगा। ईरान के विरुद्ध अमेरिका की कठोर नीति का असर भारत ही नहीं समूचे विश्व पर पड़ेगा, क्योंकि ईरान से तेल की आपूर्ति ठप होने से पूरे विश्व में तेल की कमी होगी। इससे तेल की कीमतों के साथ अन्य पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में भी इजाफा होगा। ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि भारत तेल के लिए सऊदी अरब से बात कर रहा है। ईरान पर अमेरिका के कड़े रूख से भारत व अन्य देशों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। दरअसल अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन चाहता है। 1979 में ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद देश को इस्लामिक गणराज्य घोषित कर दिया गया। वहां पर शासन भी धर्मगुरुओं द्वारा चलाया जाता है। ट्रंप धर्मगुरुओं के शासन को उखाड़ फेंकना चाहते हैं। इजरायल व अन्य इस्लामिक राष्ट्र अमेरिका का साथ दे रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए कौन-सा रूख अपनाए। 
ईरान पर निर्भरता कम करने के लिए भारत सरकार ने पिछले दिनों कच्चा तेल के आयात में 10 प्रतिशत की कमी लाने और विदेशी मुद्रा की बचत के लिए कई निर्णायक कदम उठाये हैं। इसके अलावा 11 सरकारी तेल कंपनियों ने आधुनिक लिग्नोसेल्यूलोजिक प्रौद्योगिकी का रास्ता अपनाया है और देश के 11 राज्यों में 12 2जी इथेनॉल संयंत्र लगाये जा रहे हैं। 
लिग्नोसेल्यूलोजिक विधि में इथेनाल तैयार करने के लिए पौधे के फल या बीज की जगह उसके तंतुओं, घास-फूस, काई और डंठल आदि का इस्तेमाल किया जाता है। तेल निर्भरता कम करने के लिए भारत और चीन मिलकर वैश्विक तेल बाजार के स्वरूप में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रहे हैं। दोनों देश बायर्स ब्लाक तेल की स्थापना करने को लेकर बहुत करीब हैं। भारत तेल आयात पर लंबे वक्त से एशियन प्रीमियम से पीड़ित रहा है। एशियाई देश अपनी तेल की जरूरतों के लिए मूलतः पश्चिम एशियाई तेल उत्पादक देशों पर निर्भर हैं। इसी निर्भरता का फायदा ये देश उठाते हैं और अन्य खरीददारों को प्रीमियम के रूप में तेल की ज्यादा कीमत अदा करने को मजबूर करते हैं। इसके विपरीत, अमेरिका तथा यूरोपीय संघ के देश पश्चिम एशिया के तेल उत्पादकों को कोई प्रीमियम नहीं देते हैं। अगर यह ब्लाक अस्तित्व में आता है तो न सिर्फ तेल उत्पादक देशों के साथ सिर्फ सौदेबाजी में मदद मिलेगी, बल्कि यह प्रीमियम खत्म भी हो सकता है।