चण्डीगढ़ एक्सप्रेस में लगेंगे एलएचबी कोच

 


लखनऊ, रेलवे प्रशासन लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से चण्डीगढ़ जाने वाली चण्डीगढ़ एक्सप्रेस में अब एलएचबी (लिंके हॉफमैन बुश) कोच लगाएगा। मई महीने के अंत तक चण्डीगढ़ एक्सप्रेस की एक ट्रेन को एलएचबी कोच में बदल दिया जाएगा। मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी (सीपीआरओ) दीपक कुमार ने शनिवार को बताया कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए चण्डीगढ़ एक्सप्रेस में एलएचबी कोच लगाए जाएंगे। मई महीने के अंत तक चण्डीगढ़ एक्सप्रेस की एक ट्रेन को एलएचबी कोच में बदल दिया जाएगा। उन्होंने ​बताया कि एलएचबी कोच से यात्रियों को नुकसान की गुंजाइश न के बराबर होती है। इसीलिए रेलवे प्रशासन अब लंबी दूरी की सभी ट्रेनों को एलएचबी कोचों में परिवर्तित करने की तैयारियों में लगा है। सीपीआरओ ने बताया कि इससे पहले चण्डीगढ़ एक्सप्रेस में लगे पुराने नीले रंग वाले कोचों को प्रोजेक्ट उत्कृष्ट के तहत बदलकर हल्के पीले सुनहरे रंग में रंगा गया था। अब इसको दूसरी ट्रेन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एलएचबी कोच का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हाल में पूर्वा एक्सप्रेस के हादसे के समय यात्रियों को मामूली सी चोटे आई थीं। इस ट्रेन में एलएचबी बोगियां लगी थी। गौरतलब है कि रिसर्च डिजाइन्स ऐंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) ने तकरीबन 10 साल पहले ऐसे कोच बनाये थे, जो आपस में टकरा न सकें। इन्‍हें लिंक हॉफमेन बुश (एलएचबी) कोच नाम दिया गया। एलएचबी कोचों में सीबीसी कपलिंग होने से ट्रेन के कोचों के पलटने और एक दूसरे पर चढ़ने की गुंजाइश नहीं रहती है। एलएचबी कोच पुराने कोचों से काफी अलग होते हैं। ये उच्च स्तरीय तकनीक से लैस है। इन कोचों में से आवाज कम होती है। पटरियों पर दौड़ते वक्‍त अंदर बैठे यात्रियों को ट्रेन के चलने की आवाज बहुत धीमी सुनाई देती है। एलएचबी कोच स्‍टेनलेस स्‍टील से बने होते हैं। जबकि इंटीरियर डिजाइन एल्‍यूमीनियम से की जाती है। जिससे कि यह कोच पहले की तुलना में थोड़े हल्‍के होते हैं। इन कोचों में कम समय व कम दूरी में अच्छे ढंग से ब्रेक लगाने में आसानी होती है। कोचों में लगे 'शाक एक्जावर' की वजह से झटकों का अनुभव भी कम होता है।