लखनऊ मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी और रद्द होने से कम हो रही यात्रियों की संख्या

लखनऊ, उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में ट्रेनों के रद्द होने और लेटलतीफी से पिछले तीन साल से लगातार यात्रियों की संख्या घटती जा रही है। जबकि मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) संजय त्रिपाठी का कहना है कि आधारभूत ढांचा मजबूत होने पर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। रेलवे प्रशासन पटरियों की मरम्मत, डबलिंग, सिग्नलिंग व नॉन- इंटरलॉकिंग के साथ स्टेशनों की मरम्मत के लिए लगातार ट्रेनों को रद्द कर रहा है। ट्रेनों के रद्द होने के साथ ही ब्लॉक लेने पर कई ट्रेनों को बदले रूट से भी चलाया जा रहा है। कई ट्रेनें तो मरम्मत के नाम पर पिछले छह महीने से निरस्त है। रेलवे प्रशासन इसे आधारभूत ढांचे में मजबूती के लिए जरूरी बता रहा है। पर, ट्रेनों की संचालन पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव से यात्री आजिज आ गए हैं। इसलिए यात्रियों की संख्या लगातार कम हो रही है। पिछले तीन साल के आंकड़ों के मुताबिक,वर्ष 2016-17 में उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में यात्रियों की संख्या करीब 7.66 करोड़ थी जो वर्ष 2018-19 में घटकर 7.09 करोड़ पहुंच गई। यही हाल पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के स्टेशनों पर भी है। वर्ष 2016-17 में यात्रियों की संख्या करीब 6.88 करोड़ थी जो वर्ष 2018-19 में घटकर छह करोड़ हो गई है। आंकड़ों के अनुसार,ट्रेनों की लेटलतीफी, असुरक्षित सफर, डिरेलमेंट, खराब एसी, बंद पंखे, गंदे शौचालय और उस पर ट्रेनों के बार-बार रद्द होने से नाराज करीब 1.45 करोड़ यात्रियों ने तीन साल में उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल से मुंह मोड़ लिया है। इनमें से 57 लाख यात्री उत्तर रेलवे के स्टेशनों और 88 लाख पूर्वोत्तर रेलवे के स्टेशनों पर कम हुए हैं। उत्तर रेलवे के नए डीआरएम संजय त्रिपाठी का कहना है कि हादसों पर अंकुश लगाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर रेल पटरियों की मरम्मत कराई जा रही है। इसलिए ट्रेनों को निरस्त या डायवर्ट किया जा रहा है। मरम्मत की वजह से ट्रेनें लेटलतीफी का भी शिकार हो रही हैं।


उन्होंने कहा कि यात्रियों की संख्या जो अभी कम हो रही है आधारभूत ढांचा मजबूत होने पर अपने आप ही बढ़ने लगेगी।