नजर आ रही हैं चाय-पान की दुकानों पर रोज कई बार सरकारें बनती बिगड़ती
लखनऊ, ।  सत्रहवीं लोकसभा के लिए उत्तर प्रदेश की 80 सीटों के उम्मीदवारों की किस्मत का खुलासा यद्यपि 23 मई को होगा, लेकिन सियासत में रुचि रखने वाले लोग चुनावी नतीजों को लेकर गलियों और चौराहों पर वोटों का गुणा भाग करने में मस्त हैं। सूबे के प्रमुख चौराहों और चाय-पान की दुकानों पर न केवल उम्मीदवारों के जीत-हार के कयास लग रहे हैं, बल्कि रोज कई बार सरकारें भी बनती बिगड़ती नजर आ रही हैं।

रविवार को प्रदेश में आखिरी दौर का मतदान जैसे ही समाप्त हुआ, खबरिया चैनलों पर एग्जिट पोल प्रारम्भ हो गया। अधिकतर एग्जिट पोल केंद्र में फिर से नरेंद्र मोदी की सरकार के पक्ष में नतीजे दिखाने लगे। सर्वे एजेंसियों के ये एग्जिट पोल रविवार देर रात तक विभिन्न टीवी चैनलों पर छाये रहे और राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोग लगातार टेलीविजन से चिपके रहे।

हालांकि, विपक्षी दलों ने एग्जिट पोल के नतीजों को सिरे से खारिज कर दिया, लेकिन सियासी समझ वाले लोगों को सोमवार सुबह से बतकही का एक नया विषय मिल गया। चाय-पान की दुकानों और प्रमुख चौराहों पर सोमवार सुबह से शुरु हुई चुनावी नतीजों की यह बतकही अभी अंतिम दौर तक नहीं पहुंच सकी है।

  लखनऊ के सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार का कहना है कि लोगों में चुनावी गणित की समझ हो अथवा नहीं, लेकिन वह हर व्यक्ति जिसकी राजनीति में थोड़ी भी रुचि है, इस समय चुनावी नतीजों को लेकर बहस कर रहा है। यदि किसी का कोई प्रिय कहीं से चुनावी मैदान में है, तो चर्चा के दौरान उसकी पूरी चुनावी गणित अपने उम्मीदवार के ही पक्ष में दिखती नजर आती है।

चुनावों के बाद नतीजों को लेकर कयास लगाने में प्रयागराज के लोग बड़े ही माहिर हैं। कुम्भ नगरी का चौक और लोकनाथ इलाका हो अथवा सिविल लाइंस स्थित काफी हाउस या कटरा का यूनीवर्सिटी रोड चौराहों। इन स्थानों पर बड़े-बड़े बतंगड़ दिन रात सियासी बहस में मशगूल रहते हैं। हाईकोर्ट और जनपद न्यायालय में वकीलों के चैम्बर भी इस समय चुनावी नतीजों को लेकर टीवी चैनलों के डिवेट शो बने हुए हैं।  वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र कहते हैं नगर के अलावा गांवों और कस्बों के चौराहों पर भी इस समय चुनावी नतीजे ही चर्चा के मुख्य विषय बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी तो इस चर्चा में सबसे आगे है। काशी वैसे भी जीवंत नगरी मानी जाती है। धर्म और आध्यात्म के अलावा सियासी चर्चा वहां हर गली और मोहल्ले की रौनक मानी जाती है। और, जब देश का प्रधानमंत्री स्वयं वहां से चुनावी मैदान में हो तो स्थिति सोने पे सोहागा वाली हो जाती है। 19 मई को वहां का जैसे ही मतदान समाप्त हुआ, लोग इस चर्चा में मशगूल हो गये कि नरेंद्र मोदी इस बार वहां से रिकार्ड मतों से अपनी जीत दर्ज करेंगे। वाराणसी के युवा उद्यमी वैभव कपूर बताते हैं कि इस समय काशी के लोग इसी गुणा भाग में लगे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के जीत का अंतर कितना अधिक होगा।  गौरतलब है कि 17वीं लोकसभा के आम चुनाव सात चरणों में हुए। उत्तर प्रदेश में भी 80 सीटों के लिए सातों चरण में क्रमशः 11, 18, 23 व 29 अप्रैल और 06, 12 तथा 19 मई को मतदान हुए। अब पूरे देश में मतगणना का कार्य एक साथ 23 मई को सम्पन्न होगा।