बलरामपुर अस्पताल में साहित्यकार नेत्रपाल सिंह का निधन 
लखनऊ, । साहित्यकार प्रोफेसरनेत्रपाल सिंह का शनिवार को लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। प्रोफेसर ने देहदान की इच्छा व्यक्त की थी। प्रोफेसर सिंह की इच्छानुसार ही उनके परिजनों ने केजीएमयू में उनका देहदान कर दिया है।  उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा वर्ष 2017 में उन्हें अवंतीबाई साहित्य सम्मान से सम्मानित भी किया गया था। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भी थे। उन्होंने संघ से संबंधित भी कई पुस्तकें लिखी हैं। वर्तमान में वह राजाजीपुरम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के प्रबंधक भी थे।  लखनऊ पश्चिम विधानसभा के विधायक सुरेशचन्द्र ​श्रीवास्तव ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जाने से साहित्य जगत की अपूर्णीय क्षति हुई है। 

राष्ट्रधर्म पत्रिका के प्रबंध संपादक पवन पुत्र बादल ने कहा कि अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता होने के बावजूद उन्होंने हिन्दी साहित्य की बहुत सेवा की। उन्हें देश के कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले हैं। 

 

जीवन परिचय 

उनके पिता का नाम स्व. तिलक सिंह था। वह ग्राम नगला सरदार,पत्रालय ढ़टिंगरा तहसील अलीगंज जिला एटा के रहने वाले थे। उनका जन्म 10 अक्टूबर सन 1940 में हुआ था। वह अंग्रेजी व हिन्दी साहित्य से परास्नातक थे। वह राजकीय गोविन्द वल्लभ पंत पालीटेक्निक लखनऊ में अंग्रेजी के प्रोफेसर थे।  

प्रकाशित कृतियां 

उनकी अनेक पत्र पत्रिकाओं में विविध विषयों पर लेख,निबन्ध,कविताएं व कहानियां प्रकाशित हुई हैं। क्रान्तिवीर तेज सिंह (ऐतिहासिक नाटक), काव्याकाश(संयुक्त काव्य संग्रह),खण्डित प्रतिमा (कहानी संग्रह) और मेरी प्रिय कविताएं(काव्य संग्रह) प्रकाशित हुए हैं। उनका बहादुर बन्दा बैरागी ऐतिहासिक उपन्यास बेहद लोकप्रिय है।