बाराबंकी में कोरोनावायरस पीडि़तों की बढ़ती हुई संख्या जनता के लिए दहशत

कोरोना महामारी अब इनके जरिए गांवों तक पहुंच रही है


बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों में यह महामारी ज्यादा पाई गई?


कोरोनावायरस अब गांव-गांव बंटाधार करता नजर आएगा? 



 

बाराबंकी। दूसरे प्रांतों से कामगारों की घर वापसी  के बाद गांव-गांव, शहर-शहर, कस्बे-कस्बे में कोरोना वायरस संक्रमितो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। क्वॉरेंटाइन सेंटरों में अव्यवस्थाओ और  प्रशासनिक व्यवस्था में सरकार ने जल्द सुधार नहीं किया तो कोरोना गांव-गांव तक बंटाधार करता नजर आएगा। खुली आंखों से साफ दिख रहा है कि होम क्वॉरेंटाइन व्यवस्था में इस महामारी से लडऩे की सारे प्रयास फिलहाल फेल होते नजर आ रहे हैं? 

देश में कोरोना महामारी से लडऩे के लिए केंद्र एवं राज्य की सरकारें अपने-अपने स्तर से सारे प्रयास करती दिखती है। जिस प्रकार से पूरे देश में तेजी से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है वह इस बात का परिचायक है कि सरकार एवं प्रशासन के द्वारा किए जा रहे बचाव के उपायों में कोई कमी जरूर रह गई है? जाहिर है जब इस महामारी का जन्म नवजात शिशु के रूप में था तब देश इससे बड़ी गंभीरता से लड़ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे इसका आकार बढ़ा हमारी प्रशासनिक व्यवस्था अथवा सरकार की मंशा में इससे लडऩे की क्षमता कमजोर होती नजर आई? आज जब पूरी ताकत से इससे लडऩे की जरूरत है तो कहीं ना कहीं हमारा सिस्टम काहिली का शिकार हो गया है?  राजनीतिक दल के लोग आपस में सियासी युद्ध करने में जुट गए हैं। तो वहीं सरकार का ध्यान भी इसमें रमता नजर आ रहा है!

दूसरी ओर कोरोनावायरस पीडि़तों की बढ़ती हुई संख्या जनता के लिए दहशत का कारण बन गई है। सैकड़ों हजारों एवं लाखों प्रवासी मजदूर अपने अपने घरों को वापस लौट रहे हैं। जिसके बाद कोरोना महामारी अब इनके जरिए गांवों तक पहुंच रही है। खासकर यदि हम बात करें उत्तर प्रदेश की तो यहंा पर होम क्वारंटीन  की व्यवस्था को सरकार अथवा प्रशासन ने अंगीकार किया है। हालात यह है कि इस व्यवस्था के चलते कोरोना से संक्रमित व्यक्ति बेपरवाही के चिकित्सीय परीक्षण के बाद गांव पहुंच जाता है। अपने घर में रहने का वादा लेता है लेकिन बाद में वह इस पर खरा नहीं उतरता ।यदि संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या पर बारीकी से नजर डाली जाए तो साफ दिखता है कि बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों में यह महामारी ज्यादा पाई गई?  यही नहीं इनके आराम से घूमने अथवा लोगों से मिलने के चलते अन्य लोगों में भी यह बीमारी फैली? प्रदेश के जनपद बाराबंकी में जिस तरह से संक्रमित मरीजों की संख्या एकाएक बढ़ी उसे देखकर यह बात तय हो गई होम क्वारन्टीन की व्यवस्था पूरी तरह से विफल है? यहंा का प्रशासन भी काहिली का शिकार हुआ। इस एक उदाहरण से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि जिन प्रदेशों में होम क्वारणटीन की व्यवस्था की गई है। वहंा पर मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। सरकार को इस व्यवस्था पर तत्काल समीक्षा करनी चाहिए। काफी दिनों से इस महामारी से लडऩे वाले वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक जो एक उनमें बासीपन आया है उसे दूर करने के उपाय भी सरकार को करने चाहिए। महामारी का भय जनता में घर करता जा रहा है। लेकिन सच यह भी है कि ऐसे भी तमाम लोग हैं जो लॉक डाउन के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। प्रशासन इस मामले में ढिलवाही भी बरत रहा है? जहंा पर मरीज मिलते हैं वहंा सख्ती दिखाई देती है ।लेकिन एक-दो दिन के बाद सब कुछ वैसा ही हो जाता है जैसे वर्तमान में दिनचर्या नहीं होनी चाहिए। जहंा पर संक्रमित मरीज मिले हैं उनके क्षेत्रों को हॉटस्पॉट घोषित कर दिया गया है।  लेकिन  कई ऐसे क्षेत्रों को देखने के बाद जो स्थिति भचतित करती है वह यह है कि कई लोग आवश्यक वस्तुओं के आसानी से ना मिलने पर इसके नियमों को विवशता में तोड़ते हैं?  कुल मिलाकर ऐसे क्षेत्रों में डोर टू डोर आवश्यक वस्तुओं की आपूॢत की व्यवस्था भी अत्यंत जरूरी है। खबरें मिल रही हैं कि ऐसे क्षेत्रों में डोर टू डोर वस्तुओं की आपूॢत कराने में प्रदेश के जनपद स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी फेल होते जा  रहे हैं? जिसके चलते मजबूरी में आम जनता को अपनी वस्तुओं को पाने के लिए बाहर निकलना ही पड़ता है! जहंा पर संक्रमित मरीज पाए गए हैं अथवा नहीं भी पाए गए हैं वहंा भी जो दुकाने पास बनाकर खोली गई हैं। वहंा भी भीड़ इकट्ठी होती दिखाई दे ही जाती है?

स्पष्ट है कि केंद्र एवं राज्य सरकारों को कोरोना की बढ़ती संख्या के सामने अब पूरी शक्ति एवं सतर्कता के साथ आना ही होगा। होम क्वारन्टीन की जो व्यवस्था सरकार ने उत्तर प्रदेश में दी है इस पर विचार करके नई व्यवस्था सोचनी होगी। इसके लिए प्रवासी मजदूरों अथवा कामगारों के लिए शेल्टर होम बनाए जाने चाहिए। वहंा पर संपूर्ण व्यवस्थाएं भी दी जानी आवश्यक हैं। क्योंकि अब तक कोरोना से जनता को बचाने  जो उपाय हुए हैं वह होम क्वॉरेंटाइन की नई व्यवस्था में होम होते जा रहे हैं? कटु  सत्य है कि यदि सरकार ने अपने प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों का उत्साहवर्धन न किया ।उन्हें इस महामारी से लडऩे के लिए कोई नई  संजीवनी ना दी। जनता को मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर ध्यान न दिया, उहापोह की स्थिति को खत्म करने की कोशिश ना की तो यह तय है कि कोरोनावायरस अब गांव-गांव बंटाधार करता नजर आएगा? दुर्भाग्यवश यदि कहीं यह स्थिति आ गई तो हालात बहुत ही बेकाबू होंगे? इसलिए सरकार को नए सिरे से जल्दी से जल्दी कुछ नया एवं सार्थक सोचने की जरूरत है।