अतिकुपोषित बच्चों के अभिभावकों को दी जायेगी गाय : योगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिये कि अति कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को एक एक गाय उपलब्ध करायी जाये। लोकभवन में वीडियो कॉन्फ्रेंभसग के माध्यम से सात सितंबर से शुरू हो रहे राष्ट्रीय पोषण माह-2020 के सफल आयोजन की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय के दूध से स्वास्थ्य अच्छा होगा, बल्कि कम्पोस्ट भी तैयार होगा। उन्होने कहा कि पोषण अभियान का उद्देश्य विभिन्न आयु वर्ग में व्याप्त कुपोषण की दरों में कमी लाना है। इसके लिए मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है।



उन्होने कहा कि स्वस्थ समाज की कुंजी पोषण की जागरूकता है। कुपोषण से मुक्ति के लिए बच्चों के साथ-साथ महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा अति-आवश्यक है। सुपोषित उत्तर प्रदेश के निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।
उत्तर प्रदेश, पोषण माह में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर सके, इस उद्देश्य के साथ सभी विभाग कार्य करें। गोरखपुर व आस-पास के क्षेत्रों में इंसेफ़ेलाइटिस के दंश को हमने नियंत्रित किया है। यह एक सफलतम उदाहरण है। इससे सीखा जा सकता है। श्री योगी ने कहा कि कुपोषण की रोकथाम में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज, शिक्षा विभाग के मध्य बहुत अच्छा कन्वर्जेन्स होना चाहिए, क्योंकि पोषण सेवायें इनके साथ सीधी जुड़ी हैं। साथ ही कृषि, ग्राम्य विकास, खाद्य एवं रसद, आयुष तथा उद्यान विभागों की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि यह विभाग परिवार के स्वास्थ्य, पोषण एवं आर्थिक स्थिति में सुधार लाने तथा अन्न की उपलब्धता बढ़ाने में सहायक होते हैं, जो कि कुपोषण से बचाव में अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी अभियान तभी सफल हो सकता है, जब उसमें जनता भी सहभागी हो। इसके लिये अधिकारियों के अतिरिक्त जन-प्रतिनिधियों, मीडियाकर्मियों, स्वैच्छिक संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी अभियान से जोड़ा जाए, जिससे यह सही अर्थों में जनांदोलन बन सके एवं कुपोषण के स्तर में सुधार आ सके। सभी जिलों में डिजिटल पोषण पंचायतों का आयोजन किया जाए। पोषण पंचायत प्रत्येक परिवार तक पहुंचते हुए जागरूकता सृजित करेगी।



उन्होंने कहा कि पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाओं एवं जागरूकता संबंधी विषयों को स्थानीय स्तर पर माताओं व प्रत्येक परिवार से जोड़ा जाए। जब तक जागरूकता के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन नहीं होगा, तब तक प्रदेश के पोषण आंकड़ों में सुधार नहीं आएगा। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा, एएनएम, ग्राम प्रधान , स्वयं सहायता समूह के साथ मिलकर निम्न विषयों पर जन-सामान्य को जागरूक करने का प्रयास हो। इसके साथ ही, ओडीएफ/स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत कार्य कर रहे स्वच्छाग्रहियों को भी पोषण अभियान से जोड़ते हुए जागरूकता फैलाई जाए।



श्री योगी ने कहा कि इस अभियान में सामुदायिक स्थानों के साथ-साथ प्रत्येक घर में फल, सब्जी तथा औषधीय पौधे लगाने के लिये प्रोत्साहित किया जाए। भारत में आयुर्वेद की अत्यन्त प्राचीन एवं समृद्ध परम्परा है। अदरक, हल्दी, सहजन, बेल, आंवला, नीम, तुलसी, पुदीना आदि का भोजन में उपयोग करने से प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है , जिससे विभिन्न बीमारियां तथा वायरल संक्रमण से बचाव होता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि पोषण माह -2020 का एक प्रमुख उद्देश्य सैम बच्चों को शीघ्र चिन्हांकन है। आगामी 06 माह में प्रदेश के सभी जिलों में कुपोषण की दरों में एक प्रतिशत तक कमी लाने के प्रयास हों। इसके लिये बेसलाइन निर्धारित करने के लिए सभी जिलों में वृहद स्तर पर वजन व लम्बाई मापने का एक दिवसीय अभियान चलाया जाए।



श्री योगी ने बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती समेत पांच जिलों में विभिन्न सुपोषण योजनाओं के लाभार्थी बच्चों के अभिभावकों से बच्चों का हाल चाल लिया। उन्होने जन्म के समय और अब बच्चे के वजन, उम्र, ग्रोथ, सरकार द्बारा मिल रहे लाभ आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए सभी के स्वस्थ जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों को गोवंश पालन का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि गाय से कम्पोस्ट भी मिल सकेगा और दूध भी।